ऑटो कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनी धूत ट्र्रांसमिशन (Dhoot Transmission) ने अपने निवेशकों को मालामाल कर दिया है. आज 17 अगस्त, 2026 को कंपनी के शेयरों की NSE, BSE पर धमाकेदार लिस्टिंग हुई है. NSE पर Dhoot Transmission का शेयर ₹1,200 प्रति शेयर पर लिस्ट हुआ, जो इसके इश्यू प्राइस ₹871 से करीब 37.77% ज़्यादा है. वहीं BSE पर यह शेयर ₹1,193.80 पर खुला, जो कि इश्यू प्राइस से करीब 37.06% प्रीमियम पर है. फिलहाल ये शेयर हल्की मुनाफावसूली के बाद 1,150 रुपये पर ट्रेड कर रहा है.
IPO को मिला दमदार रिस्पॉन्स
लिस्टिंग से पहले ही यह साफ हो गया था कि निवेशकों में इस IPO को लेकर बहुत दिलचस्पी है. NSE के ऑफिशियल डेटा के मुताबिक – बुधवार को बोली लगाने के आखिरी दिन तक Dhoot Transmission का इश्यू कुल 74.21 गुना सब्सक्राइब हो चुका था. ₹3,067 करोड़ के इस IPO के लिए कंपनी ने 2,49,56,363 शेयर ऑफर पर रखे थे, जिसके बदले निवेशकों की ओर से 1,85,19,71,585 शेयरों के लिए बोलियां आईं.
ग्रे मार्केट में भी रौनक रही
लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में भी Dhoot Transmission के शेयरों को लेकर अच्छा माहौल बना हुआ था. आज इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम 258 रुपये पर था. अगर IPO प्राइस बैंड के ऊपरी छोर यानी ₹871 और मौजूदा ग्रे मार्केट प्रीमियम को साथ रखकर देखा जाए, तो शेयर की अनुमानित लिस्टिंग कीमत करीब ₹1,129 प्रति शेयर बैठ रही थी, जो इश्यू प्राइस से लगभग 29.62% ज़्यादा थी.
पिछले 15 सेशन के ग्रे मार्केट प्रदर्शन पर नज़र डालें तो आज इसका GMP बढ़ते रुझान के साथ दिख रहा था, जो मज़बूत लिस्टिंग के संकेत दे रहा था. 3 अगस्त को इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम सिर्फ 146 रुपये पर था, जो बाद में बढ़ते बढ़ते 12 अगस्त को इश्यू के क्लोजिंग वाले दिन 276 रुपये तक भी पहुंचा, फिलहाल आज ये 262 रुपये पर है.
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किस कैटेगरी में कितना सब्सक्रिप्शन
निवेशकों की अलग-अलग कैटेगरी की बात करें तो सबसे ज़्यादा दिलचस्पी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) ने दिखाई, जिनका हिस्सा 212.92 गुना भरा. नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों (NII) के लिए रखा गया कोटा 51.93 गुना सब्सक्राइब हुआ, जबकि रिटेल निवेशकों के हिस्से को 8.12 गुना बोलियां मिलीं. कुल मिलाकर, मज़बूत सब्सक्रिप्शन आंकड़ों के बाद बाज़ार में इस लिस्टिंग को लेकर जो उम्मीद बनी थी, शेयर ने डेब्यू के दिन ही उस पर खरा उतरकर दिखा दिया.
एंकर निवेशकों से पहले ही जुटाई थी बड़ी रकम
IPO खुलने से पहले ही Dhoot Transmission ने एंकर निवेशकों से ₹918.3 करोड़ जुटा लिए थे. इन एंकर निवेशकों में BlackRock, Abu Dhabi Investment Authority और SBI Mutual Funds जैसे बड़े नाम शामिल थे, जिनकी मौजूदगी ने भी बाज़ार में इस इश्यू को लेकर भरोसा बढ़ाने का काम किया. कंपनी ने अपने IPO के लिए 829-871 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था.
कहां होगा पैसों का इस्तेमाल
IPO के फ्रेश इश्यू से मिलने वाले करीब ₹1,400 करोड़ का इस्तेमाल कंपनी खासतौर पर कर्ज घटाने में करेगी. इसके अलावा कंपनी अपनी कुछ सब्सिडियरीज में भी पैसा लगाएगी, ताकि वहां के कर्ज को कम किया जा सके. यानी IPO से जुटाई गई रकम का एक बड़ा हिस्सा सीधे कारोबार का विस्तार करने के बजाय कंपनी की वित्तीय स्थिति सुधारने में इस्तेमाल होगा.
इसके अलावा, कंपनी ने हरियाणा के झज्जर और तमिलनाडु के होसुर के शूलागिरी में नई वायरिंग हार्नेस मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने की भी योजना बनाई है. ऑटोमोबाइल कंपनियों में वायरिंग हार्नेस बेहद महत्वपूर्ण कंपोनेंट होता है. वाहन में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की बढ़ती संख्या के साथ इसकी मांग भी बढ़ रही है.
कंपनी का पूरा कारोबार समझिए
ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी कंपनी Dhoot Transmission की शुरुआत 1991 में हुई थी. कंपनी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए जरूरी वायरिंग हार्नेस, इलेक्ट्रॉनिक सेंसर, ऑटोमोटिव स्विच और EV से जुड़े कंपोनेंट्स बनाती है. कंपनी का कारोबार सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रिटेन, स्लोवाकिया, थाईलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया तक फैला हुआ है.
कंपनी के उत्पाद सिर्फ एक तरह के वाहन तक सीमित नहीं हैं. ये टू-व्हीलर्स, थ्री-व्हीलर्स, पैसेंजर व्हीकल्स, कमर्शियल व्हीकल्स के लिए भी कंपोनेंट्स तैयार करती है. यानी कंपनी का क्लाइंट बेस ऑटो सेक्टर के कई अलग-अलग हिस्सों में फैला हुआ है.
ICE के साथ EV पर भी फोकस
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार तेजी से हो रहा है. धूत ट्रांसमिशन की खासियत ये है कि कंपनी पारंपरिक इंटरनल कम्बशन इंजन यानी ICE वाहनों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी EV सेगमेंट के लिए भी कंपोनेंट्स बनाती है. इससे कंपनी को ऑटो इंडस्ट्री के इलेक्ट्रिफिकेशन ट्रेंड का फायदा उठाने का मौका मिल सकता है. हालांकि EV में बदलाव के साथ ऑटो कंपोनेंट कंपनियों के सामने नई टेक्नोलॉजी और लगातार निवेश की चुनौती भी रहती है. ऐसे में धूत ट्रांसमिशन के लिए नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज और अधिग्रहण आने वाले वर्षों में अहम हो सकते हैं.
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