घरेलू संस्थागत निवेशकों की ओर से ऊंचे वैल्युएशन को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद क्विक कॉमर्स सेक्टर की कंपनी Zepto ने अपने आने वाले IPO की वैल्युएशन को पहले के मुकाबले आधा कर दिया है. कुछ महीने पहले कंपनी 7 बिलियन डॉलर (₹60,000 करोड़) के वैल्युएशन पर IPO लेकर आ रही थी. मगर, जेप्टो ने इसको 3 बिलियन डॉलर (₹29,000 करोड़) के वैल्युएशन पर लाने की तैयारी कर रही है.
आइए विस्तार से समझते हैं ये पूरी कहानी, आखिर निवेशक इस पर एतराज़ क्यों जता रहे हैं.
कंपनी की वैल्युएशन आधी
पिछले साल अक्टूबर में Zepto ने अमेरिकी पेंशन फंड CalPERS की अगुवाई में 450 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई थी. जिसमें General Catalyst, Avra, Lightspeed, StepStone और Nexus Venture Partners जैसे मौजूदा निवेशक भी शामिल हुए थे. उस समय कंपनी की वैल्यूएशन 7 बिलियन डॉलर आंकी गई थी. लेकिन अब जब कंपनी अपना IPO लाने की तैयारी कर रही है, तो जेप्टो के लिए हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. कंपनी अपनी वैल्युएशन को घटाने पर विचार कर रही है.
Bloomberg की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशक फिलहाल कंपनी को करीब 4.5 बिलियन डॉलर के प्री-मनी वैल्यूएशन पर आंक रहे हैं, जबकि कुछ घरेलू संस्थागत निवेशकों का अनुमान इससे भी कम है. यानी 3 से 3.5 बिलियन डॉलर के करीब. कहने का मतलब ये कि कंपनी की वैल्युएशन में करीब 50% तक की कटौती हो सकती है. इसकी दो बड़ी वजहें बताई जा रही हैं.
1- कंपनी का ऊंचा कैश बर्न
2- मुनाफे को लेकर बना हुआ अनिश्चितता का माहौल.
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MFs की नाराजगी बड़ी वजह
Zepto के लिए दिक्कत सिर्फ बाहरी बाजार हालात तक नहीं है, भारत के बड़े घरेलू म्यूचुअल फंड हाउसेज़ ने भी कंपनी की मांगी गई वैल्यूएशन पर अपनी असहमति जताई है. Economic Times की एक रिपोर्ट के हवाले से सामने आया है कि कई बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों ने Zepto के मालिकों से साफ कह दिया कि वो घटी हुई वैल्यूएशन पर भी इश्यू सब्सक्राइब करने में सहज नहीं हैं.
इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक Zepto चाहती है कि उसके IPO की वैल्युएशन भी Eternal और Swiggy की तर्ज पर ही किया जाए. जबकि निवेशकों का तर्क ये है कि Zepto के कारोबार में फूड डिलीवरी वर्टिकल मौजूद नहीं है, जबकि इसके दोनों कंपटीटर्स इस सेगमेंट में पहले से मौजूद हैं. जबकि Zepto सिर्फ क्विक कॉमर्स तक तक ही सीमित है. ये बात भी वैल्यूएशन को लेकर सवाल खड़े करने की एक वजह मानी जा रही है. यही वजह है कि टॉप म्यूचुअल फंड्स और बड़ी घरेलू बीमा कंपनियां घटाई गई वैल्यूएशन के मुकाबले भी 30% से 40% तक की और कटौती चाहती हैं.
IPO साइज में भी हो सकती है कटौती
वैल्यूएशन पर मची खींचतान का सीधा असर अब IPO के साइज़ पर भी पड़ सकता है. कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अपने पब्लिक इश्यू के साइज में करीब 20% तक की कटौती कर सकती है. पहले जहां करीब 850 मिलियन डॉलर जुटाने की योजना थी, वहीं अब 650 से 700 मिलियन डॉलर की बात हो रही है. ये फैसला निवेशकों की तरफ से मिली तीखी प्रतिक्रिया के बाद लिया जा रहा है.
IPO Details
Zepto का ये IPO बुक-बिल्ट इश्यू के तौर पर आ रहा है, जिसमें करीब 8,010 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू और 11.35 करोड़ इक्विटी शेयरों तक की ऑफर फॉर सेल शामिल है. Axis Capital इस इश्यू की बुक रनिंग लीड मैनेजर है, जबकि Kfin Technologies रजिस्ट्रार की भूमिका निभा रही है. SEBI ने इस साल मई में ही Zepto के IPO को मंजूरी दी थी. प्राइस बैंड और इश्यू की तारीखों का ऐलान अभी होना बाकी है.
कंपनी का कारोबार और ग्रोथ
Zepto की शुरुआत 2021 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी छोड़ चुके आदित पालीचा और कैवल्य वोहरा ने की थी. कंपनी की शुरुआत 10 मिनट में ग्रॉसरी डिलीवरी के मॉडल के साथ हुई थी, और आज ये भारत के 66 से ज्यादा शहरों में 1,139 डार्क स्टोर्स के नेटवर्क के साथ काम कर रही है.
कंपनी की ग्रोथ के आंकड़े काफी दमदार हैं. FY2025 में कंपनी का रेवेन्यू 149% बढ़कर 11,110 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो इससे पिछले साल 4,454 करोड़ रुपये था. मार्च 2026 तक कंपनी के पास 47.97 मिलियन वार्षिक ट्रांजैक्टिंग यूजर्स (ATU) थे, और औसतन रोजाना 23.3 लाख ऑर्डर प्रोसेस हो रहे थे. कंपनी के यूनिट इकोनॉमिक्स में भी सुधार देखने को मिला है. ये प्रति ऑर्डर फिक्स्ड कॉस्ट FY2024 की पहली तिमाही के 80.72 रुपये से घटकर FY2026 की चौथी तिमाही में 52.34 रुपये पर आ गई, जबकि डिजिटल मार्केटिंग खर्च प्रति ऑर्डर 10.82 रुपये से घटकर महज 1.01 रुपये रह गया.
Zepto के लिए रास्ता आसान नहीं
क्विक कॉमर्स सेगमेंट में Zepto का मुकाबला Eternal (जोमैटो) के Blinkit, स्विगी के Instamart, टाटा ग्रुप के BigBasket और Amazon और JioMart जैसी बड़ी कंपनियों से है. ये सेक्टर भारी डिस्काउंट और तेज विस्तार के दौर से गुजर रहा है, जिसके चलते ज्यादातर प्लेयर्स को मुनाफे की राह पर आने में समय लग रहा है. यही वजह है कि निवेशक अब सिर्फ ग्रोथ के आंकड़ों पर आंख मूंदकर नहीं बैठे रहना चाहते, वो मुनाफा देखना चाहते हैं. यही Zepto की वैल्यूएशन पर सवाल उठने की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आया है.
इससे निवेशक क्या समझें
Zepto की वैल्यूएशन में आई इस कटौती को क्विक कॉमर्स सेक्टर के लिए एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. पिछले कुछ सालों में न्यूज एज टेक कंपनियों, स्टार्टअप्स को मिल रही ऊंची वैल्यूएशन पर अब निवेशक ज्यादा सतर्क रुख अपना रहे हैं, खासकर उन कंपनियों के लिए जो अभी तक स्थिर मुनाफे की स्थिति में नहीं पहुंची हैं. आने वाले हफ्तों में Zepto के प्राइस बैंड और IPO की तारीखों के ऐलान के बाद ही ये साफ हो पाएगा कि कंपनी को आखिरकार किस वैल्यूएशन पर बाजार में उतरना पड़ेगा, लेकिन फिलहाल जो संकेत मिल रहे हैं, उनसे साफ है कि यह इश्यू पहले की उम्मीदों से काफी छोटा होगा.
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